18 फरवरी 2026 – संपादकीय विश्लेषण
विषय: वैश्विक दक्षिण में भारत की उभरती भूमिका
हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में भारत ने स्वयं को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ के रूप में स्थापित किया है। G20, BRICS और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत ने विकासशील देशों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
पृष्ठभूमि
- कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री पहल
- ऋण संकट से जूझ रहे देशों के लिए समाधान की पहल
- जलवायु वित्त (Climate Finance) की मांग
भारत की रणनीति
1. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy):
भारत किसी भी शक्ति-गुट का हिस्सा बने बिना संतुलित कूटनीति अपनाता है।
2. विकास आधारित नेतृत्व:
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), UPI मॉडल को अन्य देशों के साथ साझा करना।
3. जलवायु न्याय (Climate Justice):
विकसित देशों से ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाने की मांग।
चुनौतियाँ
- भू-राजनीतिक तनाव (US-China Rivalry)
- ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता
- आर्थिक असमानताएँ
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
✔ GS Paper 3 – अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण
✔ निबंध – “भारत और वैश्विक दक्षिण” विषय पर संभावित प्रश्न
निष्कर्ष
भारत की वैश्विक दक्षिण में नेतृत्वकारी भूमिका केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि विकास-आधारित और मूल्य-आधारित है। यदि भारत संतुलित नीति और समावेशी विकास को बनाए रखता है, तो वह 2047 तक एक प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में उभर सकता है।
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