वैश्विक दक्षिण में भारत का नेतृत्व – कूटनीतिक संतुलन एवं सुरक्षा रणनीति
1️⃣ रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)
भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है – रणनीतिक स्वायत्तता। भारत किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि संतुलित और बहुध्रुवीय नीति अपनाता है।
मुख्य उदाहरण:
• रूस-यूक्रेन संकट में संतुलित रुख
• अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ समानांतर संबंध
• QUAD और BRICS दोनों में सक्रिय भागीदारी
• रूस-यूक्रेन संकट में संतुलित रुख
• अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ समानांतर संबंध
• QUAD और BRICS दोनों में सक्रिय भागीदारी
2️⃣ सुरक्षा संरचना (Security Architecture)
भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है।
- समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकॉनमी
- आतंकवाद विरोधी सहयोग
- सीमा सुरक्षा एवं रक्षा आधुनिकीकरण
- साइबर सुरक्षा एवं अंतरिक्ष सुरक्षा
महत्वपूर्ण पहल:
• SAGAR (Security and Growth for All in the Region)
• इंडो-पैसिफिक विज़न
• रक्षा निर्यात में वृद्धि
• SAGAR (Security and Growth for All in the Region)
• इंडो-पैसिफिक विज़न
• रक्षा निर्यात में वृद्धि
3️⃣ वैश्विक दक्षिण के लिए भारत का संदेश
भारत शक्ति संतुलन की राजनीति के बजाय सहयोग आधारित विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है।
- बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
- संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
- संवाद आधारित समाधान
4️⃣ चुनौतियाँ
- चीन का बढ़ता प्रभाव
- सीमा विवाद
- क्षेत्रीय अस्थिरता
- महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा
5️⃣ UPSC संभावित प्रश्न
- रणनीतिक स्वायत्तता भारत की विदेश नीति की आधारशिला क्यों है?
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
- वैश्विक दक्षिण के संदर्भ में भारत की सुरक्षा नीति की समीक्षा कीजिए।
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Clarity • Strategy • Civil Services Excellence
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