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Tuesday, 17 February 2026

 

 वैश्विक दक्षिण में भारत का नेतृत्व – कूटनीतिक संतुलन एवं सुरक्षा रणनीति


 1️⃣ रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)

भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है – रणनीतिक स्वायत्तता। भारत किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि संतुलित और बहुध्रुवीय नीति अपनाता है।

मुख्य उदाहरण:
• रूस-यूक्रेन संकट में संतुलित रुख
• अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ समानांतर संबंध
• QUAD और BRICS दोनों में सक्रिय भागीदारी

 2️⃣ सुरक्षा संरचना (Security Architecture)

भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है।

  • समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकॉनमी
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • सीमा सुरक्षा एवं रक्षा आधुनिकीकरण
  • साइबर सुरक्षा एवं अंतरिक्ष सुरक्षा
महत्वपूर्ण पहल:
• SAGAR (Security and Growth for All in the Region)
• इंडो-पैसिफिक विज़न
• रक्षा निर्यात में वृद्धि

 3️⃣ वैश्विक दक्षिण के लिए भारत का संदेश

भारत शक्ति संतुलन की राजनीति के बजाय सहयोग आधारित विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है।

  • बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
  • संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
  • संवाद आधारित समाधान

 4️⃣ चुनौतियाँ

  • चीन का बढ़ता प्रभाव
  • सीमा विवाद
  • क्षेत्रीय अस्थिरता
  • महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा

 5️⃣ UPSC संभावित प्रश्न

  • रणनीतिक स्वायत्तता भारत की विदेश नीति की आधारशिला क्यों है?
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
  • वैश्विक दक्षिण के संदर्भ में भारत की सुरक्षा नीति की समीक्षा कीजिए।

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