📘 19 फरवरी 2026 – दैनिक समसामयिकी (हिंदी)
Page 4 – Editorial Analysis
संपादकीय विषय: बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की रणनीतिक भूमिका
🔹 प्रस्तावना (Introduction)
21वीं सदी की वैश्विक राजनीति तेजी से बहुध्रुवीय (Multipolar) स्वरूप ग्रहण कर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की अस्थिरता तथा वैश्विक आर्थिक असमानता ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को जटिल बना दिया है।
ऐसे परिवेश में भारत एक संतुलित, स्वतंत्र और रणनीतिक रूप से स्वायत्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
🔹 मुख्य विश्लेषण (Body)
1️⃣ रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)
भारत ने अपनी विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को अपनाया है। इसका अर्थ है कि भारत किसी एक महाशक्ति के प्रभाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता है।
- क्वाड में भागीदारी
- ब्रिक्स सदस्यता
- रूस के साथ रक्षा सहयोग
- अमेरिका के साथ तकनीकी साझेदारी
यह संतुलन भारत को वैश्विक मंच पर विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।
2️⃣ ग्लोबल साउथ का नेतृत्व
भारत ने विकासशील देशों के लिए वित्तीय न्याय, जलवायु न्याय और वैश्विक शासन सुधार की मांग को प्रमुखता से उठाया है।
- G20 में विकासशील देशों की आवाज़
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की वकालत
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा
यह नीति भारत को “विकासशील विश्व का प्रतिनिधि” बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।
3️⃣ आर्थिक एवं तकनीकी शक्ति का निर्माण
सेमीकंडक्टर मिशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित ऊर्जा निवेश भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे हैं।
तकनीकी आत्मनिर्भरता ही भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आधार है।
🔹 चुनौतियाँ (Challenges)
- महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना
- ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
- वैश्विक आर्थिक मंदी का प्रभाव
- क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे
🔹 निष्कर्ष (Conclusion)
भारत की विदेश नीति संतुलन, स्वायत्तता और विकासोन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित है। बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका केवल एक क्षेत्रीय शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रही है।
रणनीतिक स्वायत्तता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक दक्षिण नेतृत्व भारत को 2047 तक एक विकसित और प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेंगे।
- उत्तर लिखते समय प्रस्तावना–मुख्य भाग–निष्कर्ष संरचना अपनाएँ।
- समसामयिकी को स्थैतिक विषयों (IR, GS-2, GS-3) से जोड़ें।
- डेटा और उदाहरण जोड़ने से उत्तर प्रभावशाली बनता है।
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