वैश्विक दक्षिण में भारत का नेतृत्व – रणनीतिक स्वायत्तता
1️⃣ रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)
भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है – रणनीतिक स्वायत्तता। इसका अर्थ है कि भारत किसी एक शक्ति ब्लॉक (USA या China) पर निर्भर न रहकर स्वतंत्र निर्णय लेता है।
मुख्य तत्व:
• बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन
• राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
• संतुलित कूटनीति (Balanced Diplomacy)
• आत्मनिर्भर रक्षा नीति
• बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन
• राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
• संतुलित कूटनीति (Balanced Diplomacy)
• आत्मनिर्भर रक्षा नीति
2️⃣ भारत की कूटनीतिक रणनीति
- BRICS के माध्यम से आर्थिक सहयोग
- G20 मंच पर विकासशील देशों की आवाज़
- अफ्रीका एवं लैटिन अमेरिका के साथ साझेदारी
- वैक्सीन मैत्री एवं मानवीय सहायता
3️⃣ दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation)
भारत तकनीकी सहायता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI, Aadhaar मॉडल), और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक दक्षिण देशों की सहायता कर रहा है।
उदाहरण:
• डिजिटल पेमेंट मॉडल का निर्यात
• कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
• जलवायु अनुकूल तकनीक साझा करना
• डिजिटल पेमेंट मॉडल का निर्यात
• कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
• जलवायु अनुकूल तकनीक साझा करना
4️⃣ UPSC दृष्टिकोण
GS Paper 2 (International Relations) में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रश्न इस प्रकार आ सकते हैं:
- भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का विश्लेषण कीजिए।
- वैश्विक दक्षिण में भारत की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
- South-South Cooperation की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
📘 Shaktimatha Learning – Hindi Special Topic Series
Clarity • Depth • Competitive Excellence
Clarity • Depth • Competitive Excellence
No comments:
Post a Comment