📘 अर्थशास्त्र की मूल बातें – हिंदी
Page 2 • द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र
🔹 द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)
द्वितीयक क्षेत्र में वे गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिनमें कच्चे माल को तैयार या अर्द्ध-तैयार वस्तुओं में बदला जाता है। यह प्राथमिक और तृतीयक क्षेत्रों के बीच सेतु का कार्य करता है।
मुख्य गतिविधियाँ
- उत्पादन एवं विनिर्माण उद्योग
- खाद्य प्रसंस्करण
- निर्माण (Construction)
- विद्युत एवं ऊर्जा उत्पादन
🔹 द्वितीयक क्षेत्र का महत्व
- कच्चे माल में मूल्यवर्धन
- बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन
- निर्यात वृद्धि
- औद्योगिकीकरण को बढ़ावा
🔹 तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र)
तृतीयक क्षेत्र में वे सेवाएँ शामिल होती हैं जो उत्पादन और उपभोग की प्रक्रियाओं को समर्थन प्रदान करती हैं।
उदाहरण
- परिवहन और संचार
- बैंकिंग एवं बीमा
- शिक्षा और स्वास्थ्य
- व्यापार और पर्यटन
🔹 भारत में द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र
भारत में तृतीयक क्षेत्र GDP में सबसे अधिक योगदान देता है, जबकि द्वितीयक क्षेत्र रोजगार और संरचनात्मक परिवर्तन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हालाँकि, विनिर्माण क्षेत्र की धीमी वृद्धि जॉबलेस ग्रोथ की समस्या को जन्म देती है।
🔹 प्रमुख चुनौतियाँ
- विनिर्माण में रोजगार की कमी
- सेवा क्षेत्र में असंगठित रोजगार
- कौशल असंगति (Skill Mismatch)
- अपर्याप्त अवसंरचना
परीक्षा दृष्टिकोण
द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों से जुड़े प्रश्न UPSC Prelims में अक्सर पूछे जाते हैं और GS-III में औद्योगिकीकरण, सेवा-आधारित वृद्धि और रोजगार जैसे विषयों में उपयोगी हैं।
© Shaktimatha Learning | Economics Basics – Hindi | Page 2 (Secondary & Tertiary)
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