दैनिक समसामयिकी – 3 मार्च 2026 पृष्ठ 2 – ईरान की चुनाव प्रणाली एवं भारत पर प्रभाव
1️⃣ ईरान में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
ईरान में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान (Direct Election) द्वारा चार वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है। कोई भी राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक पद पर रह सकता है।
हालाँकि, चुनाव लड़ने से पूर्व सभी उम्मीदवारों को गार्जियन काउंसिल (Guardian Council) से स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। यह परिषद 12 सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है, जो यह सुनिश्चित करती है कि उम्मीदवार इस्लामी गणराज्य के सिद्धांतों के अनुरूप हों।
- ✔ प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली
- ✔ 50% बहुमत आवश्यक (आवश्यक होने पर रनऑफ चुनाव)
- ✔ गार्जियन काउंसिल द्वारा उम्मीदवारों की जाँच
- ✔ सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के पास अंतिम रणनीतिक अधिकार
इस प्रकार, ईरान की राजनीतिक प्रणाली को “द्वैध शक्ति संरचना” (dual power structure) कहा जाता है।
2️⃣ भारत पर संभावित प्रभाव
- भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है।
- तेल कीमतों में वृद्धि से महँगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- भारत ईरान, इज़राइल और अमेरिका के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंध बनाए रखता है।
यदि क्षेत्रीय अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका प्रभाव भारत की आर्थिक वृद्धि और विदेशी नीति पर पड़ सकता है।
3️⃣ वैश्विक आर्थिक प्रभाव
- अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में अस्थिरता
- डॉलर की मजबूती
- 🥇 सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में वृद्धि
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाएँ
ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकेतक के रूप में कार्य करता है।
📚 परीक्षा दृष्टिकोण
✔ गार्जियन काउंसिल की भूमिका स्पष्ट करें।
✔ ईरान की द्वैध राजनीतिक संरचना की व्याख्या करें।
✔ मध्य-पूर्व अस्थिरता का भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बताएं।
✔ होर्मुज़ जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व स्पष्ट करें।
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