क्या लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित है?
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
जब लोकतंत्र की बात होती है, तो अधिकतर लोग केवल एक चीज़ याद करते हैं— मतदान।
वोट देना, प्रतिनिधि चुनना, और फिर पाँच वर्षों तक चुप रह जाना।
लेकिन लोकतंत्र कोई एक दिन की घटना नहीं है।
यह एक निरंतर प्रक्रिया है।
मतदान लोकतंत्र की नींव है, लेकिन पूरी इमारत नहीं।
यदि मतदान के बाद नागरिक निष्क्रिय हो जाएँ, तो लोकतंत्र धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।
लोकतंत्र जीवित रहता है जब नागरिक—
- प्रश्न पूछते हैं
- जवाबदेही की माँग करते हैं
- अल्पसंख्यक मतों की रक्षा करते हैं
- असहमति को सम्मान देते हैं
शांति का अर्थ हमेशा चुप्पी नहीं होता।
कई बार चुप्पी सहभागिता के अभाव का संकेत होती है।
लोकतंत्र तब कमजोर नहीं होता जब लोग असहमत होते हैं,
बल्कि तब जब लोग परवाह करना छोड़ देते हैं।
लोकतंत्र नागरिकों से समय, जागरूकता, और नैतिक साहस की अपेक्षा करता है।
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