मूल्यों के बिना शिक्षा — एक गंभीर खतरा
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
आज शिक्षा को अक्सर अंकों, रैंक, और डिग्रियों से मापा जाता है।
सफलता का अर्थ पद, वेतन, और प्रतिष्ठा मान लिया गया है।
लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न है— क्या शिक्षा हमें बेहतर नागरिक भी बनाती है?
मूल्यहीन ज्ञान दिशा के बिना शक्ति देता है।
नैतिकता के बिना कौशल जिम्मेदारी के बिना दक्षता पैदा करता है।
इतिहास गवाह है कि नैतिक आधार के बिना शिक्षित मस्तिष्क समाज के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं।
संविधान केवल शिक्षित नागरिक नहीं, सजग और संवेदनशील नागरिक चाहता है।
ऐसे नागरिक जो समानता, गरिमा, सहिष्णुता, और न्याय को समझें।
शिक्षा को केवल यह नहीं पूछना चाहिए— “मैं कैसे सफल होऊँ?”
उसे यह भी पूछना चाहिए— “मुझे कैसे जीना चाहिए?”
विद्यालय और विश्वविद्यालय केवल नौकरी के लिए नहीं, नागरिकता के लिए भी तैयारी कराएँ।
गणतंत्र डिग्रियों से नहीं, मूल्यों से टिकता है।
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