प्रजा से नागरिक तक
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
गणतंत्र से पहले लोग शासन के अधीन थे।
आदेश माने जाते थे, प्रश्न पूछना अनुचित समझा जाता था।
जनता को प्रजा कहा जाता था।
26 जनवरी 1950 को भारत ने ऐतिहासिक परिवर्तन किया।
सत्ता शासकों से जनता के हाथों में आई।
नागरिक वह नहीं होता जो केवल आदेश माने।
नागरिक वह होता है जो समझे, प्रश्न करे, और भागीदारी निभाए।
नागरिकता का अर्थ केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है।
यह सजगता, साहस, और संवेदनशीलता मांगती है।
जब लोग प्रश्न पूछना बंद कर देते हैं, तब लोकतंत्र शोर से नहीं, चुपचाप कमजोर होता है।
गणतंत्र आज्ञाकारिता से नहीं, सहभागिता से जीवित रहता है।
नागरिक होना केवल पहचान नहीं, एक दायित्व है।
ऐसा दायित्व जो व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर समाज को रखता है।
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