संविधान जनता के लिए है
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
जब हम “संविधान” शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में अदालतें, न्यायाधीश और कानूनी भाषा आती है।
ऐसा लगता है जैसे यह आम नागरिक से बहुत दूर की चीज़ हो।
लेकिन सच्चाई यह है— संविधान अदालतों के लिए नहीं, जनता के लिए लिखा गया है।
संविधान बोलता है जब किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित किया जाता है।
संविधान बोलता है जब किसी नागरिक के साथ भेदभाव होता है।
संविधान बोलता है जब किसी की आवाज़ दबाई जाती है।
संविधान केवल तभी सक्रिय नहीं होता जब हम अदालत जाते हैं।
यह तब भी सक्रिय होता है जब हम न्याय को चुनते हैं, शक्ति को नहीं।
जो समाज संविधान को केवल एक कानूनी दस्तावेज़ मानता है, वह उसके मूल उद्देश्य को खो देता है।
कानून बच सकता है, लेकिन न्याय कमजोर हो जाता है।
संविधान हमें अनुच्छेद याद रखने को नहीं, मूल्यों को अपनाने को कहता है।
समानता कोई पाठ नहीं, एक व्यवहार है।
स्वतंत्रता कोई शब्द नहीं, एक संस्कृति है।
न्याय कोई निर्णय नहीं, रोज़ का चुनाव है।
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