विविधता में एकता
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
भारत को अक्सर “विविधताओं का देश” कहा जाता है।
भाषाएँ अलग हैं, परंपराएँ अलग हैं, विचार भी अलग हैं।
लेकिन विविधता अपने आप में एकता नहीं बनाती।
एकता तब बनती है जब भिन्नता को स्वीकार किया जाए, न कि दबाया जाए।
जब असहमति को खतरा नहीं, संवाद का अवसर समझा जाए।
यदि विविधता केवल नारे तक सीमित रहे, तो वह जल्द ही विभाजन में बदल सकती है।
सच्ची एकता समानता से नहीं, सम्मान से आती है।
यह स्वीकार करती है कि सभी आवाज़ें समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
गणतंत्र में एकता का अर्थ एक जैसे होना नहीं, बल्कि एक साथ आगे बढ़ना है।
जब हम भिन्नताओं को बोझ नहीं, शक्ति मानते हैं, तब राष्ट्र सच में मजबूत होता है।
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