अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गणतंत्र की सबसे मजबूत नींवों में से एक है।
यह नागरिकों को प्रश्न पूछने, आलोचना करने, और सत्ता को सही दिशा दिखाने का अधिकार देती है।
लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिम्मेदारी से अलग नहीं है।
डिजिटल युग में हर नागरिक के हाथ में एक मंच है।
कुछ सेकंड में लिखा गया संदेश हजारों लोगों तक पहुँच सकता है।
शब्द जानकारी दे सकते हैं।
शब्द जोड़ सकते हैं।
लेकिन शब्द भ्रम, द्वेष, और अविश्वास भी फैला सकते हैं।
संविधान बोलने का अधिकार देता है, न कि नफ़रत फैलाने का।
न ही असत्य को सच की तरह प्रस्तुत करने का।
गणतंत्र में शब्दों को अहंकार नहीं, सत्य की सेवा करनी चाहिए।
जिम्मेदार अभिव्यक्ति स्वयं से तीन प्रश्न पूछती है—
- क्या यह सत्य है?
- क्या यह न्यायसंगत है?
- क्या यह आवश्यक है?
स्वतंत्रता तभी शक्ति बनती है जब उसे विवेक का मार्गदर्शन मिले।
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