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Wednesday, 18 February 2026

 

 विशेष विषय – भारत और ग्लोबल साउथ नेतृत्व
📘 Page 4 – कूटनीतिक संतुलन एवं सुरक्षा रणनीति


🔹 बहुध्रुवीय विश्व और भारत

आज का विश्व एकध्रुवीय नहीं बल्कि बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका, चीन, यूरोप, रूस और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ – सभी वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में भारत एक संतुलनकारी शक्ति (Balancing Power) के रूप में उभर रहा है।


🔹 भारत की कूटनीतिक रणनीति

  • “सबका साथ – सबका विकास – सबका विश्वास” का वैश्विक विस्तार
  • क्वाड (QUAD) में भागीदारी
  • ब्रिक्स (BRICS) के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग
  • G20 मंच पर विकासशील देशों की आवाज

भारत की नीति किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर नहीं है, बल्कि “मल्टी-अलाइनमेंट” (Multi-alignment) की रणनीति पर आधारित है।


🔹 राष्ट्रीय सुरक्षा आयाम

  • रक्षा आत्मनिर्भरता (Make in India – Defence)
  • समुद्री सुरक्षा (इंडो-पैसिफिक रणनीति)
  • साइबर सुरक्षा एवं तकनीकी रक्षा
  • सीमा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी नीति

🔹 ग्लोबल साउथ की सुरक्षा चिंताएँ

  • आंतरिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता
  • आतंकवाद और समुद्री डकैती
  • खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा
  • जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा खतरे

भारत इन देशों को क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।


🔹 चुनौतियाँ

  • चीन की आक्रामक विदेश नीति
  • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
  • आर्थिक संसाधनों की सीमाएँ
  • क्षेत्रीय संघर्षों का प्रभाव

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण

  • GS-2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं कूटनीति
  • GS-3 – आंतरिक सुरक्षा
  • निबंध – “बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका”

संभावित प्रश्न

  • बहुध्रुवीय विश्व में भारत की संतुलनकारी भूमिका का विश्लेषण करें।
  • भारत की सुरक्षा रणनीति ग्लोबल साउथ को कैसे प्रभावित करती है?

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