विशेष विषय – भारत और ग्लोबल साउथ नेतृत्व
📘 Page 4 – कूटनीतिक संतुलन एवं सुरक्षा रणनीति
🔹 बहुध्रुवीय विश्व और भारत
आज का विश्व एकध्रुवीय नहीं बल्कि बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका, चीन, यूरोप, रूस और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ – सभी वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में भारत एक संतुलनकारी शक्ति (Balancing Power) के रूप में उभर रहा है।
🔹 भारत की कूटनीतिक रणनीति
- “सबका साथ – सबका विकास – सबका विश्वास” का वैश्विक विस्तार
- क्वाड (QUAD) में भागीदारी
- ब्रिक्स (BRICS) के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग
- G20 मंच पर विकासशील देशों की आवाज
भारत की नीति किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर नहीं है, बल्कि “मल्टी-अलाइनमेंट” (Multi-alignment) की रणनीति पर आधारित है।
🔹 राष्ट्रीय सुरक्षा आयाम
- रक्षा आत्मनिर्भरता (Make in India – Defence)
- समुद्री सुरक्षा (इंडो-पैसिफिक रणनीति)
- साइबर सुरक्षा एवं तकनीकी रक्षा
- सीमा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी नीति
🔹 ग्लोबल साउथ की सुरक्षा चिंताएँ
- आंतरिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता
- आतंकवाद और समुद्री डकैती
- खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा
- जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा खतरे
भारत इन देशों को क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
🔹 चुनौतियाँ
- चीन की आक्रामक विदेश नीति
- भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
- आर्थिक संसाधनों की सीमाएँ
- क्षेत्रीय संघर्षों का प्रभाव
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण
- GS-2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं कूटनीति
- GS-3 – आंतरिक सुरक्षा
- निबंध – “बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका”
संभावित प्रश्न
- बहुध्रुवीय विश्व में भारत की संतुलनकारी भूमिका का विश्लेषण करें।
- भारत की सुरक्षा रणनीति ग्लोबल साउथ को कैसे प्रभावित करती है?
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UPSC • State PSC • Civil Services
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