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Wednesday, 18 February 2026

 

विशेष विषय – भारत और ग्लोबल साउथ नेतृत्व
📘 Page 3 – वैश्विक शासन सुधार एवं आर्थिक मॉडल


🔹 वैश्विक शासन (Global Governance) की आवश्यकता

वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित संस्थाओं पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र, IMF, विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व सीमित है। इस असंतुलन के कारण ग्लोबल साउथ की आवाज पर्याप्त रूप से नहीं सुनी जाती।

  • UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का असंतुलन
  • IMF में मतदान शक्ति का असमान वितरण
  • जलवायु वित्त में विकसित देशों की धीमी प्रतिबद्धता

🔹 भारत की मांग – संस्थागत सुधार

  • UNSC में स्थायी सदस्यता विस्तार
  • IMF एवं विश्व बैंक में प्रतिनिधित्व बढ़ाना
  • जलवायु वित्त के न्यायसंगत वितरण की मांग
  • WTO में विकासशील देशों के हितों की रक्षा

भारत यह तर्क देता है कि वैश्विक शासन संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे।


🔹 भारत का आर्थिक मॉडल – एक वैकल्पिक दृष्टि

भारत "समावेशी विकास" और "डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर" मॉडल को ग्लोबल साउथ के लिए एक प्रेरक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

  • जन-धन, आधार, UPI मॉडल
  • स्टार्टअप और डिजिटल नवाचार
  • गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
  • हरित विकास रणनीति

🔹 दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation)

  • विकास सहायता कार्यक्रम
  • तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
  • अफ्रीकी देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ
  • स्वास्थ्य एवं वैक्सीन सहयोग

🔹 चुनौतियाँ

  • चीन का बेल्ट एंड रोड प्रभाव
  • ऋण जाल कूटनीति
  • वित्तीय संसाधनों की सीमाएँ
  • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण

  • GS-2 – अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ
  • GS-3 – आर्थिक विकास मॉडल
  • निबंध – “21वीं सदी में भारत का वैश्विक नेतृत्व”

 संभावित प्रश्न

  • वैश्विक शासन सुधार की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
  • भारत का आर्थिक मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए कैसे प्रेरणादायक है?

Published by Shaktimatha Learning
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