जलवायु परिवर्तन और भारतीय अर्थव्यवस्था
Special Topic • Page 3 • नीतियाँ, अनुकूलन एवं आगे की राह
🔹 भारत की जलवायु नीति रूपरेखा
भारत विकास आवश्यकताओं और पर्यावरणीय दायित्वों के बीच संतुलन रखते हुए समग्र नीति दृष्टिकोण अपनाता है।
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)
- राज्य जलवायु कार्य योजनाएँ (SAPCCs)
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)
- Mission LiFE (Lifestyle for Environment)
🔹 अनुकूलन (Adaptation) रणनीतियाँ
अनुकूलन का अर्थ जलवायु जोखिमों के प्रति आर्थिक व सामाजिक प्रणालियों की संवेदनशीलता कम करना है।
- जलवायु-सहनशील कृषि व सूखा-रोधी बीज
- सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण
- फसल बीमा (PMFBY)
- आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ
🔹 शमन (Mitigation) उपाय
शमन का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना है।
- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का विस्तार
- ई-मोबिलिटी व ऊर्जा दक्षता
- वनीकरण व कार्बन सिंक
- हरित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन
🔹 जलवायु कार्रवाई और आर्थिक अवसर
- ग्रीन जॉब्स का सृजन
- नवाचार व तकनीकी निवेश
- आपदा-जनित आर्थिक नुकसान में कमी
- दीर्घकालिक GDP स्थिरता
🔹 आगे की राह (Way Forward)
- आर्थिक योजना में जलवायु सहनशीलता का मुख्यधाराकरण
- जलवायु वित्त व अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुदृढ़ करना
- किसानों, गरीबों व कमजोर वर्गों पर फोकस
- व्यवहार परिवर्तन व जन-जागरूकता
- केंद्र–राज्य समन्वय में सुधार
Mains-Ready निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि विकासात्मक चुनौती है। अनुकूलन + शमन + समावेशी विकास का संतुलित मॉडल भारत के भविष्य के लिए आवश्यक है।
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