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Friday, 6 February 2026

 

 जलवायु परिवर्तन और भारतीय अर्थव्यवस्था

Special Topic • Page 3 • नीतियाँ, अनुकूलन एवं आगे की राह


🔹 भारत की जलवायु नीति रूपरेखा

भारत विकास आवश्यकताओं और पर्यावरणीय दायित्वों के बीच संतुलन रखते हुए समग्र नीति दृष्टिकोण अपनाता है।

  • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)
  • राज्य जलवायु कार्य योजनाएँ (SAPCCs)
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)
  • Mission LiFE (Lifestyle for Environment)

🔹 अनुकूलन (Adaptation) रणनीतियाँ

अनुकूलन का अर्थ जलवायु जोखिमों के प्रति आर्थिक व सामाजिक प्रणालियों की संवेदनशीलता कम करना है।

  • जलवायु-सहनशील कृषि व सूखा-रोधी बीज
  • सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण
  • फसल बीमा (PMFBY)
  • आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ

🔹 शमन (Mitigation) उपाय

शमन का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का विस्तार
  • ई-मोबिलिटी व ऊर्जा दक्षता
  • वनीकरण व कार्बन सिंक
  • हरित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन

🔹 जलवायु कार्रवाई और आर्थिक अवसर

  • ग्रीन जॉब्स का सृजन
  • नवाचार व तकनीकी निवेश
  • आपदा-जनित आर्थिक नुकसान में कमी
  • दीर्घकालिक GDP स्थिरता

🔹 आगे की राह (Way Forward)

  • आर्थिक योजना में जलवायु सहनशीलता का मुख्यधाराकरण
  • जलवायु वित्त व अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुदृढ़ करना
  • किसानों, गरीबों व कमजोर वर्गों पर फोकस
  • व्यवहार परिवर्तन व जन-जागरूकता
  • केंद्र–राज्य समन्वय में सुधार

 Mains-Ready निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि विकासात्मक चुनौती है। अनुकूलन + शमन + समावेशी विकास का संतुलित मॉडल भारत के भविष्य के लिए आवश्यक है।


© Shaktimatha Learning | Special Topic – Hindi | Page 3

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