जलवायु परिवर्तन और भारतीय अर्थव्यवस्था
Special Topic • Page 2 • गरीब, असमानता एवं क्षेत्रीय प्रभाव
🔹 जलवायु परिवर्तन का असमान प्रभाव
जलवायु परिवर्तन सभी वर्गों को समान रूप से प्रभावित नहीं करता। गरीब, हाशिए पर रहने वाले समुदाय और पिछड़े क्षेत्र इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव झेलते हैं।
🔹 गरीब वर्ग पर प्रभाव
- जलवायु-संवेदनशील आजीविका पर निर्भरता
- बचत, बीमा और सामाजिक सुरक्षा की कमी
- बाढ़, सूखा और हीटवेव के प्रति अधिक संवेदनशीलता
परिणामस्वरूप जलवायु झटके गरीबों को और अधिक गरीबी में धकेल देते हैं।
🔹 असमानता पर प्रभाव
जलवायु परिवर्तन एक असमानता बढ़ाने वाला कारक है। संसाधन सम्पन्न वर्ग अनुकूलन कर सकता है, जबकि गरीब वर्ग ऐसा नहीं कर पाता।
- ग्रामीण–शहरी असमानता
- राज्यों एवं क्षेत्रों के बीच अंतर
- लैंगिक असमानता
🔹 भारत में क्षेत्रीय प्रभाव
- सूखा प्रभावित क्षेत्र: मराठवाड़ा, बुंदेलखंड
- तटीय क्षेत्र: समुद्र स्तर वृद्धि, चक्रवात
- हिमालयी क्षेत्र: हिमनद पिघलना, भूस्खलन
इन प्रभावों के कारण जलवायु प्रेरित पलायन बढ़ रहा है।
🔹 महिलाएँ और जलवायु जोखिम
- पानी और ईंधन संग्रह का बढ़ता बोझ
- स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जोखिम
- संसाधनों और निर्णयों तक सीमित पहुँच
इस प्रकार जलवायु परिवर्तन लैंगिक असमानता को और गहरा करता है।
परीक्षा दृष्टिकोण
“जलवायु परिवर्तन एक थ्रेट मल्टीप्लायर है” यह कथन GS-III और निबंध में गरीबी, असमानता और पलायन समझाने के लिए प्रभावी है।
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