विशेष विषय
उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था – पेज 1
वैश्विक शक्ति परिवर्तन का विश्लेषण
1️⃣ एकध्रुवीय से बहुध्रुवीय विश्व की ओर
शीत युद्ध के बाद विश्व व्यवस्था मुख्यतः एकध्रुवीय रही। किन्तु 21वीं सदी में वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। उभरती अर्थव्यवस्थाएँ और क्षेत्रीय शक्तियाँ वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भूमिका निभा रही हैं।
2️⃣ शक्ति के नए केंद्र
विश्व राजनीति अब केवल एक महाशक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। आर्थिक, सैन्य और तकनीकी शक्ति के नए केंद्र विकसित हो रहे हैं।
- एशिया का बढ़ता आर्थिक प्रभाव
- क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका
- तकनीकी प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा
3️⃣ बहुध्रुवीयता की विशेषताएँ
- रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सीमित सहयोग
- क्षेत्रीय गठबंधनों का विस्तार
- आर्थिक परस्पर निर्भरता
- हाइब्रिड और साइबर युद्ध की वृद्धि
4️⃣ चुनौतियाँ और अवसर
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था अस्थिरता और अवसर दोनों लेकर आती है। यह छोटे और मध्यम शक्तियों को अधिक कूटनीतिक स्थान प्रदान करती है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण (UPSC / Essay)
“21वीं सदी की विश्व व्यवस्था बहुध्रुवीयता की ओर अग्रसर है।” इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण करें।
रणनीतिक निष्कर्ष
विश्व राजनीति एक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आने वाले वर्षों में शक्ति संतुलन और संस्थागत सुधार प्रमुख विषय रहेंगे।
अगला: पेज 2 – वैश्विक संस्थाएँ एवं शक्ति पुनर्संरेखन
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