विशेष विषय
उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था – पेज 2
वैश्विक संस्थाएँ एवं शक्ति पुनर्संरेखन
1️⃣ वैश्विक संस्थाओं की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, IMF तथा WTO जैसी संस्थाएँ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था को प्रतिबिंबित करती हैं। आज की बदलती शक्ति संरचना में इन संस्थाओं के सुधार की मांग बढ़ रही है।
2️⃣ प्रतिनिधित्व और सुधार की आवश्यकता
उभरती अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व चाहती हैं।
- सुरक्षा परिषद सुधार
- वोटिंग अधिकारों का पुनर्वितरण
- विकासशील देशों की आवाज
3️⃣ क्षेत्रीय संगठनों का उदय
क्षेत्रीय मंचों और समूहों का प्रभाव बढ़ रहा है। ये मंच आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।
- क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारियाँ
- सुरक्षा संवाद तंत्र
- बहुपक्षीय सहयोग मॉडल
4️⃣ शक्ति पुनर्संरेखन की प्रवृत्ति
देश अब एकल गठबंधन पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे बहु-संरेखीय (Multi-alignment) रणनीति अपना रहे हैं।
- रणनीतिक स्वायत्तता
- लचीली कूटनीति
- हित-आधारित सहयोग
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण (UPSC / Essay)
वैश्विक संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर चर्चा करें और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में उनकी प्रासंगिकता का विश्लेषण करें।
रणनीतिक निष्कर्ष
संस्थागत सुधार और शक्ति पुनर्संरेखन 21वीं सदी की विश्व राजनीति की केंद्रीय विशेषताएँ बनती जा रही हैं।
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