विशेष विषय – ताइवान–चीन विवाद पृष्ठ 1 – ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं “वन चाइना” नीति
1️⃣ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1949 का चीनी गृहयुद्ध)
ताइवान–चीन विवाद की जड़ें 1949 के चीनी गृहयुद्ध में निहित हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) ने मुख्यभूमि चीन पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की, जबकि कुओमिंतांग (KMT) नेतृत्व ताइवान चला गया और रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC) की सरकार वहीं से संचालित होने लगी।
तब से चीन ताइवान को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान स्वयं को एक अलग राजनीतिक इकाई के रूप में विकसित कर चुका है।
2️⃣ “वन चाइना” नीति
“वन चाइना” सिद्धांत के अनुसार केवल एक ही चीन है और ताइवान उसका हिस्सा है। चीन उन देशों से राजनयिक संबंध स्थापित करता है जो ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देते।
- ✔ अधिकांश देश आधिकारिक रूप से PRC को मान्यता देते हैं।
- ✔ ताइवान अनौपचारिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंध बनाए रखता है।
- ✔ अमेरिका “रणनीतिक अस्पष्टता” (Strategic Ambiguity) की नीति अपनाता है।
3️⃣ अमेरिका की “रणनीतिक अस्पष्टता” नीति
1979 के Taiwan Relations Act के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षात्मक समर्थन प्रदान करता है, लेकिन चीन के साथ सीधे युद्ध की स्पष्ट गारंटी नहीं देता।
इस नीति का उद्देश्य दोनों पक्षों को उकसाने से रोकना और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है।
4️⃣ ताइवान का लोकतांत्रिक विकास
मुख्यभूमि चीन की एकदलीय प्रणाली के विपरीत, ताइवान बहुदलीय लोकतंत्र, स्वतंत्र न्यायपालिका और नागरिक स्वतंत्रताओं के साथ विकसित हुआ है।
राजनीतिक प्रणालियों का यह अंतर ही क्रॉस-स्ट्रेट तनाव का प्रमुख कारण है।
📚 परीक्षा दृष्टिकोण
✔ ताइवान–चीन विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करें।
✔ “वन चाइना” नीति का विश्लेषण करें।
✔ रणनीतिक अस्पष्टता की अवधारणा समझाएँ।
✔ राजनीतिक प्रणालियों के अंतर का क्षेत्रीय तनाव पर प्रभाव बताएं।
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