विशेष विषय – ताइवान–चीन विवाद पृष्ठ 2 – सैन्य संतुलन एवं रणनीतिक प्रतिरोध
1️⃣ चीन की सैन्य शक्ति – पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA)
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) विश्व की सबसे बड़ी और तेजी से आधुनिक होती सैन्य शक्तियों में से एक है। पिछले दो दशकों में चीन ने नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और साइबर क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि की है।
- लगभग 20 लाख सक्रिय सैनिक
- विमानवाहक पोतों सहित उन्नत नौसेना
- बैलिस्टिक एवं हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली
- पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (जैसे J-20)
- 📡 साइबर एवं अंतरिक्ष युद्ध क्षमता
चीन ताइवान के आसपास नियमित सैन्य अभ्यास कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता है।
2️⃣ ताइवान की रक्षा रणनीति – असममित युद्ध (Asymmetric Warfare)
ताइवान प्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य शक्ति का मुकाबला नहीं कर सकता। इसलिए वह “असममित रक्षा रणनीति” अपनाता है, जिसका उद्देश्य संभावित आक्रमण को महंगा और जटिल बनाना है।
- एंटी-शिप और एंटी-एयर मिसाइल प्रणाली
- तटीय रक्षा एवं मोबाइल लॉन्च सिस्टम
- ताइवान जलडमरूमध्य प्राकृतिक सुरक्षा अवरोध
- उन्नत रडार और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
इस रणनीति का उद्देश्य प्रतिरोध (Deterrence) को मजबूत करना है।
3️⃣ अमेरिका की भूमिका
1979 के Taiwan Relations Act के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षात्मक हथियार प्रदान करता है। अमेरिका की सातवीं बेड़ा (US Seventh Fleet) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय है।
- इंडो-पैसिफिक में नौसैनिक उपस्थिति
- जापान और दक्षिण कोरिया के साथ सुरक्षा सहयोग
- रणनीतिक अस्पष्टता की नीति
- समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation)
अमेरिका का उद्देश्य चीन को आक्रमण से रोकना और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है।
4️⃣ संभावित युद्ध परिदृश्य
- सीमित मिसाइल या नौसैनिक टकराव
- ताइवान की नाकाबंदी (Blockade)
- अमेरिका–चीन प्रत्यक्ष संघर्ष का जोखिम
- वैश्विक आर्थिक अस्थिरता
📚 परीक्षा दृष्टिकोण
✔ चीन के सैन्य आधुनिकीकरण का विश्लेषण करें।
✔ ताइवान की असममित रक्षा रणनीति स्पष्ट करें।
✔ इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की भूमिका का मूल्यांकन करें।
✔ प्रतिरोध सिद्धांत (Deterrence Theory) की व्याख्या करें।
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