कानून का शासन बनाम शक्ति का शासन
गणतंत्र दिवस विशेष | जनता के नाम संदेश
किसी भी समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहाँ कानून चलता है या व्यक्ति की शक्ति।
यही अंतर गणतंत्र और तानाशाही के बीच रेखा खींचता है।
गणतंत्र में कानून सर्वोच्च होता है, व्यक्ति नहीं।
कानून का शासन यह सुनिश्चित करता है कि सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी नियमों के अधीन रहे।
यह कमजोर को सुरक्षा और शक्तिशाली को सीमा देता है।
जब शक्ति कानून से ऊपर हो जाती है, तब न्याय चयनात्मक बन जाता है।
नियम कुछ के लिए लचीले और कुछ के लिए कठोर हो जाते हैं।
संविधान शक्ति को नष्ट नहीं करता, उसे नियंत्रित करता है।
ताकि स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके।
जब नागरिक अन्याय को सामान्य मान लेते हैं, तब कानून का शासन चुपचाप कमजोर हो जाता है।
कानून की रक्षा केवल अदालतों का कार्य नहीं है।
यह जागरूक नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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